पारिस्थितकी (Ecology) क्या है?
किसी भी जीव को उसके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में स्टडी करना Ecology है।
यह अधूरी परिभाषा है, क्योंकि Ecology में केवल यह नहीं देखते कि जीव कहाँ रहता है, बल्कि यह भी देखते हैं कि वह भोजन कहाँ से प्राप्त करता है, किन परिस्थितियों से प्रभावित होता है, दूसरे जीवों से उसका क्या संबंध है और पर्यावरण में बदलाव का उस पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उदाहरण: शेर को जंगल में केवल देखना Ecology नहीं है। लेकिन यह अध्ययन करना कि शेर कहाँ रहता है, क्या खाता है, हिरण की संख्या से उसका क्या संबंध है, पानी और तापमान यानि उसके आस पास का पर्यावरण उसे कैसे प्रभावित करते हैं—यह Ecology है।
“Ecology में हम किसी जीव को अकेले नहीं, बल्कि उसके आसपास के पूरे पर्यावरण और दूसरे जीवों के साथ उसके संबंधों को समझते हैं।”

यानी अब तक हम समझ चुके हैं कि पारिस्थितिकी (Ecology) में हम किसी प्रजाति (Species) का अध्ययन उसके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) और पर्यावरण के संदर्भ में करते हैं।
प्राकृतिक आवास (Natural Habitat)
प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) का मतलब है—वह प्राकृतिक स्थान जहाँ कोई जीव या प्रजाति स्वाभाविक रूप से पाई जाती है और जहाँ की परिस्थितियाँ उसके जीवन के लिए अनुकूल होती हैं।
जैसे, चीड़ के पेड़ सामान्यतः पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं, क्योंकि वहाँ की जलवायु और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियाँ उनके लिए अनुकूल होती हैं।
जरा सोचिए, आम के पेड़ हमें सबसे ज्यादा कहाँ देखने को मिलते हैं? क्या बर्फीले पहाड़ों पर या गर्म मैदानी इलाकों में?
गर्म मैदानी इलाकों में, क्योंकि की गर्म जलवायु आम के पेड़ के लिए अनुकूल होती हैं। इसलिए गर्म मैदानी क्षेत्र आम के पेड़ के लिए प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) हैं, जहाँ वह स्वाभाविक रूप से पाया और विकसित होता है।
🧠 सोचिए और जवाब दीजिए
नहीं। किसी स्थान पर रहने मात्र से वह उस जीव का Natural Habitat नहीं बन जाता।
जब हम किसी जीव या प्रजाति का अध्ययन करते हैं तो हम यह देखते हैं कि दूसरे प्रजाति के साथ उसका कैसा संबंध है साथ में हम यह भी देखते हैं कि अपने पर्यावास (Habitat) में इनकी संख्या बढ़ रही है या रुकी हुई है या कम हो रही है।
अब सवाल उठता है—अगर किसी प्रजाति की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो ऐसा क्यों हो रहा है?
इसका मतलब हो सकता है कि उसके पर्यावास में कुछ ऐसे अनुकूल कारक (Favourable Factors) मौजूद हैं, जो उसके जीवित रहने, प्रजनन करने और संख्या बढ़ाने में सहायता कर रहे हैं।
लेकिन अगर किसी प्रजाति की संख्या लगातार घट रही है, तो हमें यह जानना होगा कि आखिर उसके पर्यावास में ऐसा क्या बदल गया है?
संभव है कि वहाँ कुछ हानिकारक या प्रतिकूल कारक (Adverse Factors) सक्रिय हों, जो उनकी संख्या लगातार कम कर रहे है।
यही तो पारिस्थितिकी (Ecology) का असली उद्देश्य है—किसी जीव को केवल देखना नहीं, बल्कि यह समझना कि वह अपने पर्यावरण और अन्य जीवों से कैसे प्रभावित होता है और उन्हें कैसे प्रभावित करता है।
पर्यावरण (Environment)
पर्यावरण (Environment) का अर्थ है—किसी भी जीव के आसपास मौजूद वे सभी परिस्थितियाँ, कारक और संसाधन, जो उसके जीवन को प्रभावित करते हैं।
पर्यावरण हर जगह के हिसाब से फिक्स रहता है जीव जंतु उस पर्यावरण के अनुकूलित हैं या नहीं यह महत्वपूर्ण है जैसे शेर के लिए मैदानी इलाका और गर्म जगह अनुकूलित है वह पहाड़ पर नहीं चढ़ सकता लेकिन तेंदुआ चढ़ सकता है इसलिए उसके लिए पहाड़ी और ठंडी जगह भी अनुकूलित है।
हम हमेशा ऐसा सोचते हैं कि यहां का पर्यावरण हमारे लिए अनुकूलित है या नहीं है ऐसा सोचना गलत है हमेशा ऐसा सोचिए कि उस पर्यावरण के लिए आप अनुकूलित है या नहीं।
पर्यावरण के मुख्य घटक
पर्यावरण के घटकों को दो भागों में बाँटा जाता है:
(A) जैविक घटक (Biotic Components)
वे सभी घटक जिनमें जीवन होता है या जो जीवित होते हैं, जैविक घटक कहलाते हैं।
जैसे:
- पौधे (Plants)
- शाकाहारी जीव या चरने वाले जीव (Grazers)
- मांसाहारी जीव (Carnivores)
- परजीवी (Parasites)
- रोग उत्पन्न करने वाले जीव (Pathogens)
- प्रतिस्पर्धी जीव (Competitors)
आपके नोट्स में जैविक घटकों को आगे दो आधारों पर समझाया गया है:
जैविक घटक → संसाधन (Resource) + परिस्थिति (Condition)
2. संसाधन (Resource) क्या होता है?
ऐसी वस्तु या पदार्थ जिसे कोई जीव अपने जीवन, वृद्धि या प्रजनन के लिए उपयोग या उपभोग करता है, उसे संसाधन कहते हैं।
संसाधन की मुख्य विशेषता: जीव द्वारा उपयोग किए जाने पर संसाधन की मात्रा कम हो सकती है।
उदाहरण:
पौधे → शाकाहारी जीवों के लिए भोजन हैं।
जब हिरण घास खाता है, तो घास की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए घास हिरण के लिए संसाधन (Resource) है।
इसी प्रकार:
शाकाहारी जीव (Grazers) → मांसाहारी जीवों के लिए संसाधन
उदाहरण:
घास → हिरण → शेर
इसमें:
- घास, हिरण के लिए संसाधन है।
- हिरण, शेर के लिए संसाधन है।
यानी एक जीव भी दूसरे जीव के लिए संसाधन हो सकता है।
3. जैविक परिस्थिति (Biotic Condition) क्या होती है?
जब किसी जीव की उपस्थिति दूसरे जीव के जीवन, वृद्धि या प्रजनन को प्रभावित करती है, लेकिन वह सीधे भोजन की तरह उपयोग नहीं होता, तो वह जैविक परिस्थिति (Biotic Condition) हो सकती है।
आपके नोट्स में उदाहरण हैं:
रोग उत्पन्न करने वाले जीव
जैसे:
- बैक्टीरिया (Bacteria)
- वायरस (Virus)
- रोगाणु (Pathogens)
ये किसी जीव के स्वास्थ्य, जीवित रहने और प्रजनन को प्रभावित कर सकते हैं।
उदाहरण:
यदि किसी जंगल में कोई रोग फैल जाता है, तो हिरणों की जनसंख्या कम हो सकती है। यहाँ रोग उत्पन्न करने वाले जीव पर्यावरणीय परिस्थिति को प्रभावित कर रहे हैं।
प्रतिस्पर्धी प्रजातियाँ (Competing Species)
दो जीव जब एक ही सीमित संसाधन के लिए संघर्ष करते हैं, तो प्रतिस्पर्धा होती है।
उदाहरण:
मान लीजिए जंगल में गाय और हिरण दोनों एक ही घास खाते हैं।
घास सीमित है, इसलिए:
गाय ↔ हिरण → भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा
यहाँ गाय की उपस्थिति हिरण के लिए भोजन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।
(B) अजैविक घटक (Abiotic Components)
पर्यावरण के निर्जीव या भौतिक-रासायनिक घटकों को अजैविक घटक कहते हैं।
जैसे:
- प्रकाश (Light)
- पानी (Water)
- तापमान (Temperature)
- मिट्टी (Soil)
- वायु (Air)
- खनिज लवण (Minerals)
- आर्द्रता (Humidity)
- लवणता (Salinity)
अजैविक संसाधन (Abiotic Resources)
प्रकाश (Light)
पौधे प्रकाश का उपयोग प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) में करते हैं।
पौधे:
सूर्य का प्रकाश + जल + कार्बन डाइऑक्साइड → भोजन
इसलिए प्रकाश पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
पानी (Water)
पानी जीवों द्वारा उपयोग किया जाता है।
जैसे:
- पौधे जड़ों से पानी लेते हैं।
- जानवर पानी पीते हैं।
- पानी पौधों में प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
इसलिए पानी एक संसाधन है।
खनिज लवण (Mineral Nutrients)
पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे खनिज लेते हैं।
उदाहरण:
यदि पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन लेते हैं, तो मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा कम हो सकती है।
इसलिए:
खनिज लवण → पौधों के लिए संसाधन
अजैविक परिस्थिति (Abiotic Conditions)
पर्यावरण की ऐसी विशेषताएँ जिन्हें जीव सामान्यतः भोजन की तरह उपयोग नहीं करते, लेकिन वे जीव के जीवन, वृद्धि और प्रजनन को प्रभावित करती हैं, उन्हें अजैविक परिस्थितियाँ कहते हैं।
जैसे:
तापमान (Temperature)
तापमान का जीव उपभोग नहीं करता, लेकिन तापमान जीव की शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करता है।
उदाहरण:
बहुत अधिक गर्मी में:
- शरीर से पानी की हानि बढ़ सकती है।
- एंजाइम प्रभावित हो सकते हैं।
- जीव तनाव में आ सकता है।
बहुत अधिक ठंड में:
- उपापचय (Metabolism) धीमा हो सकता है।
- जीव की गतिविधियाँ कम हो सकती हैं।
इसलिए:
तापमान = परिस्थिति (Condition)
पानी: जलीय जीवों के लिए परिस्थिति कैसे?
पानी जलीय जीवों के लिए केवल एक परिस्थिति नहीं है, बल्कि उनका माध्यम या आवास (Medium/Habitat) भी है। पानी के अंदर मौजूद विशेषताएँ परिस्थितियों की तरह काम करती हैं, जैसे:
- पानी का तापमान
- लवणता (Salinity)
- pH
- घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen)
- जल का प्रवाह
उदाहरण:
मछली पानी को भोजन की तरह समाप्त नहीं करती, लेकिन पानी का तापमान और उसमें घुली ऑक्सीजन मछली के जीवन को प्रभावित करते हैं।
जिसे जीव उपयोग या उपभोग करता है और जिसकी उपलब्धता कम हो सकती है, वह संसाधन है; जो जीव के जीवन को प्रभावित करती है लेकिन उपभोग नहीं होती, वह परिस्थिति है।
केस स्टडी प्रश्न
एक घने वन में दो वृक्ष प्रजातियाँ—प्रजाति A और प्रजाति B—एक साथ पाई जाती हैं। प्रजाति A तेजी से बढ़ती है और अपनी चौड़ी पत्तियों के कारण प्रजाति B के ऊपर घनी छाया बना देती है। परिणामस्वरूप प्रजाति B तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा कम हो जाती है तथा उसकी प्रकाश-संश्लेषण दर घट जाती है।
इसी क्षेत्र में हिरण प्रजाति A की नई पत्तियों को भोजन के रूप में खाता है। कुछ वर्षों बाद एक रोगजनक कवक (Pathogenic Fungus) फैलने से प्रजाति A के अनेक वृक्ष नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद प्रजाति B तक अधिक प्रकाश पहुँचने लगता है और उसकी वृद्धि तेज हो जाती है।
इसी अवधि में लंबे सूखे के कारण मिट्टी में उपलब्ध जल की मात्रा कम हो जाती है, जबकि क्षेत्र का औसत तापमान 3°C बढ़ जाता है। इससे प्रजाति B की वृद्धि पुनः धीमी हो जाती है।

प्रश्न
उपर्युक्त केस के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्रजाति B के लिए प्रकाश एक संसाधन है, क्योंकि प्रजाति A द्वारा प्रकाश को रोकने से प्रजाति B के लिए उसकी उपलब्धता कम हो जाती है।
- हिरण के लिए प्रजाति A की पत्तियाँ जैविक संसाधन हैं।
- प्रजाति A के लिए रोगजनक कवक केवल एक अजैविक परिस्थिति है, क्योंकि वह वृक्ष की वृद्धि को प्रभावित करता है।
- मिट्टी में उपलब्ध जल प्रजाति B के लिए अजैविक संसाधन है, जबकि तापमान एक अजैविक परिस्थिति है।
- प्रजाति A द्वारा उत्पन्न छाया के कारण प्रकाश की उपलब्धता में कमी जैविक घटक द्वारा उत्पन्न प्रभाव है, लेकिन प्रभावित होने वाला कारक प्रकाश अजैविक है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(A) केवल 1, 2 और 4
(B) केवल 1, 2, 4 और 5
(C) केवल 2, 3 और 5
(D) 1, 2, 3, 4 और 5
अपना उत्तर पहले स्वयं सोचिए।
सही उत्तर: (B) केवल 1, 2, 4 और 5
पर्यावास (Habitat)
वह प्राकृतिक स्थान या वातावरण, जहाँ किसी जीव को जीवित रहने और अपना जीवन-चक्र पूरा करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ तथा संसाधन प्राप्त होते हैं, पर्यावास (Habitat) कहलाता है।
पर्यावास वह प्राकृतिक स्थान या वातावरण है जहां कोई जीव रहता है भोजन प्राप्त करता है, प्रजनन करता है और अपना जीवन पूरा करता है।
यानी पर्यावास एक प्राकृतिक क्षेत्र है जिसके लिए एक या एक से अधिक प्रजातियां जीवित रहने के लिए अनुकूलित हैं और यहा प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
दाहरण
उदाहरण 1: मछली का पर्यावास — जल
मछली जल में जन्म लेती है, वहीं से भोजन प्राप्त करती है, जल में ही प्रजनन करती है और अपना अधिकांश जीवन जल के अंदर व्यतीत करती है। इसलिए जल मछली का पर्यावास है।
उदाहरण 2: ऊँट का पर्यावास — मरुस्थल
ऊँट मरुस्थल की गर्म एवं शुष्क परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होता है। इसलिए मरुस्थल ऊँट का प्राकृतिक पर्यावास है।
उदाहरण 3: शेर और बाघ का पर्यावास — वन
शेर और बाघ वनों तथा घास के मैदानों में रहते हैं। वहाँ उन्हें भोजन, जल, आश्रय और प्रजनन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं। इसलिए वन एवं घास के मैदान उनके पर्यावास हैं।
पर्यावास (Habitat) एक सापेक्ष अवधारणा है इसका मतलब है की पर्यावास किसी जीव के दृष्टिकोण से तय होता है ना कि केवल स्थान से।
सापेक्ष अवधारणा क्यों कहा जाता है?
सापेक्ष (Relative) का अर्थ है यह अलग-अलग जीव के लिए अलग-अलग हो सकता है जैसे एक ही स्थान किसी जीव के लिए पूरा पर्यावास हो सकता है और दूसरे के लिए केवल उसका एक छोटा सा हिस्सा।
इसे एक पेड़ के उदाहरण से समझते हैं—
🌳 पक्षी के लिए — पूरा पेड़ उसका पर्यावास हो सकता है, क्योंकि पक्षी उसकी शाखाओं पर घोंसला बनाता है, विश्राम करता है और भोजन प्राप्त करता है।
🐞 कीट के लिए — पेड़ की छाल ही उसका पर्यावास हो सकती है, क्योंकि वह छाल के अंदर या उसके ऊपर रहता है और वहीं से भोजन प्राप्त करता है।
🍄 कवक (Fungus) के लिए — पेड़ का सड़ा हुआ भाग उसका पर्यावास हो सकता है, क्योंकि वहाँ उसे वृद्धि और पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं।
यानी इससे एक बात पता चलती है कि एक ही स्थान अलग-अलग जीवन के लिए अलग-अलग तरीके से पर्यावास बन जाता है इसलिए इसे सापेक्ष अवधारणा (Relative Concept) कहा जाता है क्योंकि यह किसी भी जीव के या प्रजाति के नजरिए से तय होता है कि कौन सा हिस्सा पर्यावास होगा।
ऐसे ही चलिए आपसे एक क्वेश्चन पूछते हैं की क्या ठहरा व गंदा पानी किसी जीव के नजरिए से पर्यावास हो सकता है सोचिए?
तो इसका उत्तर है हां, ठहरा व गंदा पानी शैवाल के लिए पर्यावास है। ठहरा हुआ पानी शैवाल (Algae), कुछ सूक्ष्मजीवों तथा मच्छरों के लार्वा के लिए उपयुक्त पर्यावास हो सकता है।
मनुष्य के दृष्टिकोण से गंदा और ठहरा हुआ पानी अनुपयोगी या हानिकारक हो सकता है, लेकिन कुछ जीवों को उसी स्थान पर भोजन, पोषक तत्त्व और जीवित रहने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं। इसलिए वही स्थान उनके लिए पर्यावास बन सकता है।
इसी प्रकार, यदि हम पेड़ के सड़े हुए भाग को पक्षी के दृष्टिकोण से देखें, तो वह पक्षी का पर्यावास नहीं हो सकता। लेकिन जब उसी सड़े हुए भाग को कवक (Fungus) के दृष्टिकोण से देखते हैं, तो वह कवक के लिए उपयुक्त पर्यावास हो सकता है।
अतः—
कोई स्थान पर्यावास है या नहीं, इसका निर्धारण केवल उस स्थान की विशेषताओं से नहीं, बल्कि संबंधित जीव की आवश्यकताओं, सहनशीलता और अनुकूलनों के आधार पर किया जाता है।
एक ही स्थान अलग-अलग जीवों के लिए अलग-अलग प्रकार से पर्यावास का कार्य कर सकता है। इसलिए पर्यावास जीव या प्रजाति-सापेक्ष (Species-relative) अवधारणा है।
पर्यावास से जुड़े Case Based Question
CASE 1 : एक गाँव के पास स्थित तालाब में अत्यधिक पोषक तत्त्व एकत्र हो गए। इसके कारण शैवाल तेजी से बढ़ने लगे। तालाब का पानी मनुष्यों के पीने योग्य नहीं रहा, लेकिन उसमें कुछ सूक्ष्मजीव, मच्छरों के लार्वा और शैवाल बड़ी संख्या में पाए गए।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- मनुष्यों के लिए अनुपयोगी होने के कारण तालाब किसी भी जीव का पर्यावास नहीं हो सकता।
- तालाब शैवाल के लिए पर्यावास हो सकता है।
- किसी स्थान की पर्यावास के रूप में उपयुक्तता संबंधित जीव की आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।
- एक ही स्थान कुछ जीवों के लिए अनुकूल तथा कुछ अन्य जीवों के लिए प्रतिकूल हो सकता है।
सही उत्तर चुनिए—
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (C) केवल 2, 3 और 4
व्याख्या: किसी स्थान की उपयोगिता मनुष्य के दृष्टिकोण से निर्धारित नहीं की जाती। जो पानी मनुष्य के लिए अनुपयोगी है, वही शैवाल और कुछ सूक्ष्मजीवों के लिए उपयुक्त पर्यावास हो सकता है।
Trap: मानव-केंद्रित दृष्टिकोण (Anthropocentric View) को सभी जीवों पर लागू करना।
CASE 2 : एक प्रवासी पक्षी प्रत्येक वर्ष सर्दियों में भारत की एक आर्द्रभूमि (Wetland) में आता है। वह वहाँ भोजन प्राप्त करता है और तीन महीने तक रहता है। इसके बाद वह दूसरे देश में जाकर प्रजनन करता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) आर्द्रभूमि उसका पर्यावास नहीं है, क्योंकि वह वहाँ प्रजनन नहीं करता।
(B) केवल वह स्थान पर्यावास कहलाता है जहाँ जीव जन्म लेता है।
(C) आर्द्रभूमि उसके मौसमी पर्यावास का भाग हो सकती है।
(D) प्रवासी जीवों का कोई पर्यावास नहीं होता।
उत्तर: (C)
व्याख्या: किसी जीव का पर्यावास केवल एक स्थान तक सीमित होना आवश्यक नहीं है। प्रवासी जीव अपने जीवन-चक्र की अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए अलग-अलग स्थानों का उपयोग कर सकते हैं। आर्द्रभूमि उस पक्षी का भोजन एवं शीतकालीन पर्यावास हो सकती है।
CASE 3 : एक समुद्री कछुआ अपना अधिकांश जीवन समुद्र में व्यतीत करता है, लेकिन मादा कछुआ अंडे देने के लिए समुद्र तट की रेत पर आती है। अंडों से बच्चे निकलने के बाद समुद्र की ओर चले जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) केवल समुद्र ही कछुए का पर्यावास है, क्योंकि वह अधिकांश जीवन वहीं बिताता है।
(B) केवल समुद्र तट ही उसका पर्यावास है, क्योंकि प्रजनन वहीं होता है।
(C) समुद्र और समुद्र तट उसके जीवन-चक्र के अलग-अलग चरणों के लिए आवश्यक पर्यावास के भाग हो सकते हैं।
(D) किसी जीव के एक से अधिक पर्यावास नहीं हो सकते।
उत्तर: (C)
व्याख्या: किसी जीव के जीवन-चक्र के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग पर्यावास आवश्यक हो सकते हैं। समुद्र भोजन और जीवन-यापन के लिए आवश्यक है, जबकि समुद्र तट अंडे देने के लिए आवश्यक है।
CASE 4: एक नदी की मछली सामान्यतः नदी के गहरे भाग में रहती है, उथले भाग में भोजन प्राप्त करती है और प्रजनन के समय नदी की ऊपरी धारा की ओर चली जाती है।
इससे कौन-सा निष्कर्ष निकलता है?
(A) केवल नदी का गहरा भाग उसका पर्यावास है।
(B) केवल प्रजनन वाला क्षेत्र उसका पर्यावास है।
(C) पर्यावास में वे विभिन्न क्षेत्र शामिल हो सकते हैं जिनका उपयोग जीव जीवन-चक्र की अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए करता है।
(D) लगातार स्थान बदलने वाले जीव का कोई निश्चित पर्यावास नहीं होता।
उत्तर: (C)
CASE 5 : सबसे कठिन Concept Trap
एक वैज्ञानिक ने कहा—
“यदि किसी स्थान पर कोई जीव पाया जाता है, तो वह स्थान उस जीव का पर्यावास अवश्य होगा।”
इस कथन का सबसे उचित मूल्यांकन क्या है?
(A) पूर्णतः सही, क्योंकि जीव केवल अपने पर्यावास में पाया जाता है।
(B) सही, क्योंकि उपस्थिति ही पर्यावास का पर्याप्त प्रमाण है।
(C) पूर्णतः गलत, क्योंकि जीव अपने पर्यावास में कभी नहीं पाया जाता।
(D) आवश्यक रूप से सही नहीं, क्योंकि जीव किसी स्थान पर अस्थायी रूप से उपस्थित, प्रवासरत या केवल गुजरता हुआ भी हो सकता है।
उत्तर: (D)
CASE 6 : कठिन Concept Trap
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- किसी स्थान को पर्यावास कहने के लिए उसका मनुष्यों के लिए उपयोगी होना आवश्यक है।
- एक ही पर्यावरणीय क्षेत्र अलग-अलग जीवों के लिए अलग-अलग स्थानिक स्तर पर पर्यावास हो सकता है।
- किसी जीव का पर्यावास उसके जीवन के विभिन्न चरणों में बदल सकता है।
- किसी स्थान पर जीव की उपस्थिति मात्र उस स्थान को उसका प्राकृतिक पर्यावास सिद्ध करने के लिए हमेशा पर्याप्त नहीं होती।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(A) केवल एक
(B) केवल दो
(C) केवल तीन
(D) सभी चार
उत्तर: (C) केवल तीन
सही कथन: 2, 3 और 4