पारिस्थितिकी (Ecology) में जब हम किसी जीव (Organism) का उसके प्राकृतिक पर्यावास (Natural Habitat) में अध्ययन करते हैं, तो हम यह समझने का प्रयास करते हैं कि वह जीव वहाँ उपस्थित पर्यावरणीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार स्वयं को किस प्रकार समायोजित (Adjust) या अनुकूलित (Adapt) करता है।
हम यह भी अध्ययन करते हैं कि जीव भोजन प्राप्त करने, प्रजनन करने, वृद्धि करने, अन्य जीवों के साथ अंतःक्रिया करने तथा स्वयं को प्रतिकूल परिस्थितियों और शिकारियों से बचाने जैसी विभिन्न जैविक क्रियाओं को किस प्रकार संपन्न करता है।
पर्यावरण की परिस्थितियाँ हमेशा एक समान नहीं रहतीं। तापमान, वर्षा, जल की उपलब्धता, भोजन, प्रकाश तथा अन्य संसाधनों में समय के साथ परिवर्तन होता रहता है। ऐसी बदलती परिस्थितियों के प्रति जीव अलग-अलग प्रकार की प्रतिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं।
कुछ जीव स्वयं को नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित कर लेते हैं, कुछ अधिक अनुकूल स्थानों की ओर प्रवास (Migration) कर जाते हैं, जबकि कुछ जीव प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए निष्क्रिय अवस्था में चले जाते हैं।
लेकिन जो प्रजातियाँ बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को अनुकूलित नहीं कर पातीं, उनकी जनसंख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है और लंबे समय में उनके विलुप्त (Extinct) होने की संभावना बढ़ जाती है।
